1. Aakhir kyun mujhe tum itna dard dete ho,
Jab bhi mann mein aaye kyun rula dete ho,
Nigahen berukhi hain aur tikhe hain lafz,
Ye kaise mohabbat hain jo tum mujhse karte ho.
आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते हो,
जब भी मन में आये क्यों रुला देते हो,
निगाहें बेरुखी हैं और तीखे हैं लफ्ज़,
ये कैसी मोहब्बत हैं जो तुम मुझसे करते हो।
जब भी मन में आये क्यों रुला देते हो,
निगाहें बेरुखी हैं और तीखे हैं लफ्ज़,
ये कैसी मोहब्बत हैं जो तुम मुझसे करते हो।
2. Raaz Khol Dete Hain Nazuk Se Ishaare Aksar,
Kitni Khamosh Mohabbat Ki Jubaan Hoti Hai.राज़ खोल देते हैं नाजुक से इशारे अक्सर,
कितनी खामोश मोहब्बत की जुबान होती है।
Yahi Bahut Hai Ke Tumne Palat Ke Dekh Liya,
Yeh Lutf Bhi Meri Umeed Se Kuchh Zyada Hai.
यही बहुत है कि तुमने पलट के देख लिया,
ये लुत्फ़ भी मेरी उम्मीद से कुछ ज्यादा है।
3.Sambhale Nahi Sambhalta Hai Dil,
Mohabbat Ki Tapish Se Na Jala,Ishq TalabGaar Hai Tera Chala Aa,
Ab Zamane Ka Bahaana Na Bana.
संभाले नहीं संभलता है दिल,
मोहब्बत की तपिश से न जला,
इश्क तलबगार है तेरा चला आ,
अब ज़माने का बहाना न बना।
Roj Saahil Se Samandar Ka Najara Na Karo,
Apni Soorat Ko Shabo-Roz Nihara Na Karo,Aao Dekho Meri Najron Mein Utar Kar Khud Ko,
Aayina Hoon Main Tera Mujhse Kinara Na Karo.
रोज साहिल से समंदर का नजारा न करो,
अपनी सूरत को शबो-रोज निहारा न करो,
आओ देखो मेरी नजरों में उतर कर खुद को,
आइना हूँ मैं तेरा मुझसे किनारा न करो।
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